बृहस्पतिवार, सितम्बर 08, 2011

बवंडर


प्यार
बवंडर की तरह आया था मुझमें
किसी एक्शन मूवी की तरह
मेरे सूने जीवन में

वैसे तो महसूस ली थी खुशबू
उस चक्रवात की
उमङने-घुमङने से पहले ही
मगर, चेत न पाया

मांगने से पहले मेरे घरौंदे में
भरी थी गुलाब की पंखुङियां

मौका न था
आंगन बुहारने और बिस्तरा लगाने का
पहुंच गयी थी मेहमानों की टोली

हंसते-खिलखिलाते बारातियों का हुजूम
मेर चूल्हा जला नहीं था
लिस्ट भी नहीं बनी थी पकवानों की

मेहमान लौट गये, बिना कुछ बोले
पूछा भी तो, कर दिया बहाना

आसान न था सामना कर पाना
उन जवाबों का, जो थे...
पत्थरों से सख्त और बर्फ से ठंडे

घर बुहारा भी, बिस्तर भी सजाया
बार-बार पुकारा, संदेशा भिजवाया
मगर...

अब तो सिर्फ तूफान है
जो थमने का नाम नहीं लेता
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बरसों बाद जब मिले
तो तुम-तुम न थे
मैं भी मैं न रहा होउंगा

तुम्हें अपने बेटे को स्कूल से लाना था
और मुझे पकङनी थी शाम की ट्रेन

फिर भी मिले
क्योंकि थोड़े से हम तो बचे ही थे

वक्त के साथ रिस-रिस कर जमा हुआ
थोडा-थोडा लगाव
काफी था उस एक घंटे के लिए

शुक्र था वह एक ही घंटा था
कई दिन होते तो कोफ्त होती

जिंदगी ने सही फैसला किया था
हम नहीं बने थे एक दूजे के लिए

हमें मान लेना चाहिये था कि
जी लिया है हमने अपने रिश्ते का आखिरी पल

तुम्हारी आंखों में झांक रहा था मैं
तुमने पूछ ही लिया-
कितनी बदली हूं मैं..


बवंडर- २

मिट्टी के बरतन में
दहकते रेत की तरह
उबल रहा था दिल
तभी जन्मा था प्यार

कितनी कोशिशें की थी
उस दहकते रेत को
मुट्ठी में भर लेने की मैंने
फिसलती रही रेत और
रिसता रहा हथेलियों से खून

अब, जब रात उतर आयी
और चांद का ठंडा पानी
रेत में रिस रहा है
तुम मेरे दिल में हो
बवंडर की तरह
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पूछना चाहता हूं
सिर्फ एक सवाल

कई बार पूछा
बारहां चुप ही रह गया

उसने कई बार दिये थे जवाब
बारहां टाल भी दिया

अब भी वही एक सवाल
एक ही सवाल के क्यों हैं
इतने सारे जवाब...
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लोग लाख कहें
मुझसे न दिया जायेगा कोई इल्जाम
सराहूंगा या चुप रहूंगा

मुझे कुछ कहना नहीं है
सिर्फ पूछना है
और चुप रहना है

कुछ भी साबित नहीं करना है मुझे
मेरा प्रेम तो खुद ही साबित है
जगजाहिर है

मैं चुप रहता हूं
और सुनता हूं
कई जवाबों को, जो एक ही सवाल के हैं

दूसरों के मुंह से छनकर आते हैं तुम्हारे जवाब
जवाबों की लिस्ट लंबी हो रही है
और गहरी हैं मेरी चुप्पियां
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रोज रात
जब मैं लेता हूं बीपी की दवा
याद आता है मुझे वह प्यार

वह असफल प्रेम
जो बरसों घुमङता रहा
तूफान की तरह मेरे सीने में
अब एक रोग है

डिप्रेशन में खाये गये
जंक फूड
धमनियों में जमा हैं
और बहुत धीरे-धीरे थम रही है
दिल की धङकनें

कम नहीं होती खून की रफ्तार
हर रात याद आता है मुझे मेरा प्यार

1 टिप्पणी:

Indu ने कहा…

Budhe ho rahe tum...